Friday, June 25, 2010

लखनऊ के डग्गेबाज पत्रकार!

पत्रकारिता के गिरते स्तर की खबरे आये दिन मिलती रहती है.चाहे वह दिल्ली हो या मुम्बई अथवा कोई और जगह.लेकिन हाल ही में नजाकत और नफासत के शहर लखनऊ में पत्रकारिता का घिनौना रूप उस समय देखने को मिला जब यहां के एक पंचसितारा होटल में एक मल्टीनेशनल कम्पनी की तरफ से अपने नये उत्पाद के सम्बन्ध में आयोजित की गयी कांफ्रेंस के दौरान डग्गे (गिफ्ट ) को लेकर पत्रकारों में धक्का मुक्की शुरू हो गयी.बगैर इन्वीटेशन के पहुंचे तथाकथित पत्रकार तो गिफ्ट लेकर रफूचक्कर हो गये लेकिन जो वास्तविक पत्रकार थें वह धक्कामुक्की में असफल होने के बाद हताश दिख रहे थें गिफृट पाने की इस कदर होड मची थी कि जो युवतियां वहां गिफ्ट बांटने के लिए बैठाली गयी थी उनके चेहरे की हवाइयां उडी हुई थी कई बार इस धक्कामुक्की में वह अपने को सुरक्षित करने के लिए जैसे ही पीछे हटती तब तक उनके हाथ से गिफ्ट गायब हो चुका होता था.एक बार तो ऐसा मौका आया कि एक गिफ्ट पर एक कैमरामैन और एक स्वयभू पत्रकार का हाथ एक साथ पड गया जिसे लेकर दोनो में मारपीट की नौबत आ गयी लेकिन जीत स्वयंभू पत्रकार की हुई.यह स्वयभूं पत्रकार एक धार्मिक शिक्षण संस्था से अधिक गिफ्ट पाने के लिए तीन चार छात्रों को लेकर पंचसितारा होटल पहुंचे थें

इसी तरह लखनऊ में एक जाने माने शिक्षण संस्थान के प्रबन्धकों की तरफ से महीने में दो तीन बार प्रेस कांफेन्स का आयोजन किया जाता है. जिसमें स्कूल की उपलब्धियों का गुणगान काफी देर तक किया जाता है प्रेस कांफ्रेन्स के बाद खाने पीने का इंतजाम तो रहता ही साथ में गिफ्ट भी रहता है. इसे लेकर भी एक अलग तरह का नजारा हर प्रेस कांफेन्स में देखने को मिलता है एक बार तो हद तब हो गयी जब प्रबन्धक महोदय स्कूल की उपलब्धियां गिना रहे थें और सारे पत्रकार मन में डग्गे की कल्पना लिए खाने की ओर बढ रहे थें स्कूल प्रबन्धक की तरफ से कई बार आग्रह करने के बाद भी जब पत्रकार नही रूके तो उन्हे कहना पडा रोक दीजिये...................खाना रोक दीजिये

Tuesday, June 15, 2010

प्रेमी प्रेमिकाओं के लिए मुफीद है मुंह लपेटू संस्कृति

इन दिनों भीषण गर्मी के चलते हर कोई परेशान है लेकिन युवा वर्ग गर्मी को लेकर इसलिए परेशान नही है क्योंकि चेहरे पर नकाब षैली में दुपट्टा लपेट कर और प्रेमी की कमर में हाथ डालकर बाइक में धूमने का मजा तो इन्ही दिनों है शहरों में नये नये दो पहिया वाहनों में यह जोडे अपने कुल देवता इमरान हाशमी और मल्लिका शेरावत का स्मरण करते हुए इस नये तरीके से बेहद आनन्दित है गर्मी के बहाने चेहरे पर नकाब स्टाइल दुपटटा लपेटने का फैशन इन दिनों खूब फलफूल रहा है गर्मी की आड में चेहरे को कपडे से ढककर सैर सपाटे करने का प्रचलन इन दिनों खूब जोरों पर है एक समाज सुधारवादी संगठन के नेता ने मुझसे कहा कि ‘‘आप लोग मीडिया वाले इस पर कुछ लिखते क्यों नही’’ इस पर हमने कहा कि ‘‘आप लोग पहल कीजिए. हम उसका कवरेज कर शासन प्रशासन तक आपकी बात पहुंचायेगें जिस पर उन सज्जन ने कहा कि इसका विरोध करने पर देश की धर्मनिरपेक्ष छवि पर भारी असर पड सकता है इसलिए हिम्मत नही पड रही है हांलकि उन्होने अपनी बात को बल देते हुए एक बार फिर कहा कि मध्यप्रदेश पुलिस ने तो दोपहिया वाहन सवारों पर चेहरा ढककर घूमने में प्रतिबन्ध लगाया हुआ है तो यहां उत्तर प्रदेश में इसपर प्रतिबन्ध क्यों नही लग सकता है
वैसे युवा प्रेमी प्रेमिकाओं में सिर छुपाओं संस्कृति का क्रेज दिन पर दिन बढता ही जा रहा है अब तो ‘‘जाडा गर्मी हो बरसात दुपट्टा रखों अपने साथ’’ का सिद्वान्त देश में खूब फल फूल रहा है यही नही, बाइक सवार यह युवा प्रेमी जोडे उस समय तो और अधिक आनन्दित होते है जब बगल से उनके माता पिता उनको बगैर पहचाने यह कहते निकल जाते है कि जमाना बहुत खराब हो गया है मा बाप अपने बच्चों पर निगाह भी नही रखते है..........